नेल पॉलिश-राशि अनुसार

4 08 2009

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ज्योतिष में रंगों का विशेष महžव बताया गया है। राशि अनुसार अनुकूल रंगों के प्रयोग से संबंधित ग्रह की अनुकूलता में वृद्धि होती है। चीनी ज्योतिष के अनुसार भी अलग-अलग रंगों की प्रवृत्ति अलग-अलग होने के कारण मानव की प्रवृत्ति पर असर करते हैं। शरीर के लिए भी अनुकूल रंगों के प्रयोग करने से सकारात्मक ऊर्जा “ची” को संतुलित कर समन्वय किया जा सकता है। इससे सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। इसी क्रम में महिलाओं द्वारा प्रयोग की जाने वाली नाखून पॉलिश का रंग यदि उनकी राशि के अनुरूप हो तो संबंधित राशि स्वामी के कारक में वृद्धि तथा शुभ फलों की प्राप्ति होती है।

मेष राशि- मेष राशि की महिलाएं लालिमायुक्त, सफेद, क्रीमी तथा मेहरून रंग की नेल पॉलिश प्रयोग में लाएं।
वृष राशि- लाल, सफेद, गेहूंआ या गुलाबी रंग या इनसे मिश्रित रंगों की नेल पॉलिश लगाएं।
मिथुन- आपके लिए हरी, फिरोजी, सुनहरा सफेद या सफेद रंग की नेल पॉलिश उपयुक्त रहेगी।
कर्क- श्वेत व लाल या इनसे मिश्रित रंग अथवा लालिमायुक्त सफेद रंग की नेल पॉलिश का प्रयोग उपयोगी रहेगा।
सिंह- गुलाबी, सफेद, गेरूआ, फिरोजी तथा लालिमायुक्त सफेद रंग उपयुक्त है।
कन्या- आप हरे, फिरोजी व सफेद रंग की नेल पॉलिश लगाएं।
तुला- जामुनी, सफेद, गुलाबी, नीली, ऑफ व्हाइट एवं आसमानी रंग की नेल पॉलिश अनुकूल रहेगी।
वृश्चिक- सुनहरी सफेद, मेहरून, गेरूआ, लाल, चमकीली गुलाबी या इन रंगों से मिश्रित रंग की नेल पॉलिश लगाएं।
धनु- पीला, सुनहरा, चमकदार सफेद, गुलाबी या लालिमायुक्त पीले रंग की पॉलिश लगाएं।
मकर- सफेद, चमकीला सफेद, हल्का सुनहरी, मोरपंखी, बैंगनी तथा आसमानी रंग की नेल पॉलिश उपयुक्त है।
कुंभ- जामुनी, नीला, बैंगनी, आसमानी तथा चमकीला सफेद रंग उत्तम रहेगा।
मीन- पीला, सुनहरा, सफेद, बसंती रंगों का प्रयोग करें। सदा अनुकूल प्रभाव देंगे।
ऊपर बताए गए रंग राशि स्वामी तथा उनके मित्र ग्रहों के रंगों के अनुकूल हैं।





आप व्यवसाय करेंगे या नौकरी

30 07 2009

कोई व्यक्ति व्यापार करेगा या नौकरी, इसका पता दशमांश वर्ग से किया जाता है। नौकरी या व्यवसाय में सफलता या असफलता का पता भी इससे लगता है। हो सकता है कि आम व्यक्ति यह नहीं समझ सके की दशमांश वर्ग क्या है, इसलिए आइए इसे समझें। राशि के अंशों के दस समान भाग करने पर जो वर्ग बनता है, उसे दशमांश कहते हैं। जन्म कुंडली के दसवें भाव से व्यक्ति का कर्म क्षेत्र जाना जाता है कि वह व्यापार करेगा या नौकरी। उसकी नौकरी या व्यवसाय बिना किसी रूकावट के चलता रहेगा या कोई परेशानी आएगी।

यदि दशमेश और दशम भाव में स्थित ग्रह दशमांश वर्ग में प्रबल हो, व्यक्ति को व्यवसाय में सफलता विशेष रूप से मिलती है। व्यक्ति व्यवसाय करेगा या नौकरी इसके लिए भी कुंडली में दशम भाव में स्थित ग्रह दशमांश कुंडली में स्थिर राशि और शुभ ग्रहों से युक्त होंगे, तभी सफलता मिलेगी। दशमांश के लग्न का स्वामी और लग्नेश दोनों एक ही तžव राशि के और शुभ हों।

इसके विपरित यदि दशम भाव स्थित ग्रह दशमांश कुंडली में चर राशि में स्थित हो और अशुभ ग्रहों से युक्त हों, तो व्यक्ति नौकरी करता है। दशमांश वर्ग, लग्न स्वामी और लग्नेश में परस्पर शत्रुता व्यवसाय में अस्थिरता लाती है। दशमांश में ग्रह विशेष शुभ हैं और कुंडली में भी ग्रह शुभ योगों में हैं, तो नौकरी हो या व्यापार दोनों में ही व्यक्ति उच्च कोटि का काम करता है। एक पदाधिकारी की कुंडली में नौकरी से संबंधित ग्रह उच्च कोटि में होंगे, तभी वह अधिकारी पद पर पहुंचता है। एक व्यापारी की कुंडली में व्यापार से संबंधित ग्रह दशमांश और कुंडली दोनों में शुभ स्थित में होते हैं।
-राजेश वर्मा





ललाट पर तिलक की परंपरा

27 07 2009

img_1607aहमारी संस्कृति में किसी भी पूजा, पाठ, यज्ञ, अनुष्ठान आदि का शुभारंभ श्रीगणेश पूजा से आरंभ होता है। उसी प्रकार बिना तिलक धारण किए कोई भी पूजा-प्रार्थना आरंभ नहीं होती। धर्म मान्यतानुसार सूने मस्तक को अशुभ और असुरक्षित माना जाता है। तिलक चंदन, रोली, कुंकुम, सिंदूर तथा भस्म का लगाया जाता है। तंत्रशास्त्र में तिलक की अनेक क्रिया-विधियां विभिन्न कार्यों की सफलता के लिए बताई गई हैं।
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार कालपुरूष की गणना प्रथम राशि मेष से की गई है। महर्षि पराशर के सिद्धांत के अनुसार कालपुरूष के मस्तक वाले स्थान में मेष राशि स्थित है। जिसका स्वामी मंगल ग्रह सिंदूरी लाल रंग का अधिष्ठाता है। सिंदूरी लाल रंग राशि पथ की मेष राशि का ही रंग है। इसीलिए इस रंग (लाल रोली या सिंदूर) का तिलक मेष राशि वाले स्थान (मस्तक) पर लगाया जाता है। तिलक लगाने में सहायक हाथ की अंगुलियों का भी भिन्न-भिन्न महžव बताया है।

तिलक धारण करने में अनामिका अंगुली शांति प्रदान करती है। मध्यमा अंगुली मनुष्य की आयु वृद्धि करती है। अंगूठा प्रभाव और ख्याति तथा आरोग्य प्रदान कराता है। इसीलिए राजतिलक अथवा विजय तिलक अंगूठे से ही करने की परंपरा रही है। तर्जनी मोक्ष देने वाली अंगुली है। सामुद्रिकशास्त्र के अनुसार भी अनामिका तथा अंगूठा तिलक करने में सदा शुभ माने गए हैं। अनामिका सूर्य पर्वत की अधिष्ठाता अंगुली है। यह अंगुली सूर्य का प्रतिनिधित्व करती है, जिसका तात्पर्य यही है कि सूर्य के समान, दृढ़ता, तेजस्व, प्रभाव, सम्मान, सूर्य जैसी निष्ठा-प्रतिष्ठा बनी रहे। दूसरा अंगूठा है जो हाथ में शुक्र क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है। शुक्र ग्रह जीवन शक्ति का प्रतीक है। संजीवनी विद्या का प्रणेता तथा जीवन में सौम्यता, सुख-साधन तथा काम-शक्ति देने वाला शुक्र ही संसार का रचयिता है।





patrika.com blogosphere

19 01 2009

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