शांतिपूर्ण क्रांति की जरूरत

1 08 2009

नई दिल्ली। राजस्थान पत्रिका समूह के संस्थापक कर्पूर चन्द्र कुलिश की स्मृति में देश के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कार केसी कुलिश इंटरनेशनल अवार्ड फॉर एक्सिलेंस इन प्रिंट जर्नलिज्म का भव्य और गरिमापूर्ण समारोह शुक्रवार को नई दिल्ली के ताज पैलेस होटल में आयोजित किया गया। समारोह की मुख्य अतिथि लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने इस अवसर पर अपने संवेदनशील सम्बोधन में कहा कि आज देश में शांतिपूर्ण क्रांति की आवश्यकता है। आप जहां हैं, वहीं से लोगों के मानस में बदलाव कर समाज को बेहतर बना सकते हैं। समारोह की अध्यक्षता करते हुए राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि आज समाज के हर क्षेत्र में आ रही गिरावट चिंता का विषय है और इस पर राष्ट्रीय बहस की आवश्यकता है।

दस को मेरिट अवार्ड

समारोह में दस मेरिट अवार्ड भी दिए गए। इनमें हिन्दुस्तान टाइम्स, चण्डीगढ़ के कंवर संधु की टीम को “इण्डियाज पोरस बोर्डर्स”, हिन्दुस्तान, लखनऊ के दयाशंकर शुक्ला की टीम को “इस आतंकवादी की खता क्या थी”, अमर उजाला, वाराणासी के तिरविजय सिंह की टीम को ” अब शुरू हुआ ऑपरेशन आजमगढ़”, दैनिक जागरण, नई दिल्ली के अंशुमन सिंह की टीम को “आतंक का अर्थशास्त्र”, न्यूयॉर्क टाइम्स, अमरीका के हरिकुमार एवं हीदर टिमोन्स को “वायलेंस इन इण्डिया”, इण्डियन एक्सप्रेस, चण्डीगढ़ के नितिन जैन की टीम को “मुम्बईज टेरर मेक्स मोहाली ब्लीड”, द ट्रिब्यून, चण्डीगढ़ की शाहिरा नईम की टीम को ” आजमगढ़: डिस्ट्रिक्ट इन डिस्कम्फर्ट”, हिन्दुस्तान टाइम्स, गुवाहाटी के राहुल करमाकर की टीम को “ही लव्ड हॉलीवुड़ कॉप वर्सेज बडीज मूवीज”, द ट्रिब्यून, चण्डीगढ़ के प्रभजोत सिंह को “लंच ऑवर्स, इवनिंग आर चूजन फॉर टेरर स्ट्राइक्स” और डेली मिरर, श्रीलंका कीजमीला नजीमुद्दीन को “वाट ब्रांचेज ग्रो इन दिस स्टोनी रबिश” खबरों के लिए पुरस्कृत किया गया।

173 प्रविष्टियां मिलीं

पुरस्कार का चयन 2008 में एक जनवरी से 31 दिसम्बर तक प्रकाशित समाचारों में से किया गया। चयन मण्डल को अमरीका, फ्रांस, सर्बिया, मॉरिशस, मिश्र, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और श्रीलंका सहित दुनिया भर के मीडिया संस्थानों से 173 प्रविष्टियां प्राप्त हुई। पुरस्कार चयन मण्डल में देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्र द हिन्दू के एडीटर इन चीफ एन. राम, आईआईएम, इंदौर के निदेशक एन. रविचन्द्रन, मेग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित अरूणा रॉय और पत्रिका समूह के प्रधान सम्पादक गुलाब कोठारी शामिल रहे। पत्रकारिता के साथ ही विज्ञापनों के सामाजिक महत्व को भी पत्रिका समूह ने समझा है। इसी दृष्टिकोण से पिछले एक दशक से सामाजिक क्षेत्र से जुड़े श्रेष्ठ विज्ञापनों को पत्रिका समूह की ओर से कन्सन्र्ड कम्यूनिकेटर अवार्ड दिया जा रहा है। गत वर्ष से इस पुरस्कार की राशि भी कर्पूर चन्द्र कुलिश की स्मृति में 11 हजार अमरीकी डॉलर की जा चुकी है।

मूल्यों में गिरावट चिंता का विषय: गहलोत

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि केसी कुलिश अवार्ड के लिए (आतंकवाद और समाज) जो विषय चुना है। उससे इस अवार्ड का महत्व और बढ़ गया है। देश के सामने आज आतंकवाद और नक्सलवाद सहित कई चुनौतियां हैं। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद इस साठ साल के दौर में मूल्यों में गिरावट आना चिन्ता का विषय है। अब सोच समझकर आगे बढ़ना होगा।

उन्होंने कहा कि राजस्थान पत्रिका समूह के संस्थापक कर्पूर चन्द्र कुलिश संघर्षशील व्यक्तित्व के धनी थे। आजादी के बाद वे पत्रकारिता में आगे आए। आज राजस्थान पत्रिका प्रदेश के हर घर में अपनी पहचान रखती है। पत्रकारिता ही नहीं सामाजिक सरोकारों में भी राजस्थान पत्रिका का कोई सानी नहीं।
गुजरात व महाराष्ट्र का भूकम्प, करगिल युद्ध व अन्य कई मौकों पर पत्रिका ने आगे आकर समाज हित के लिए कार्य किया है। यही कारण है कि लोग आज पत्रिका समूह को सहयोग दे रहे हैं। पत्रिका समूह ने केसी कुलिश अवार्ड शुरू कर अच्छा कदम उठाया है। प्रतिभा की खोज करना बड़ी बात है। इस अवार्ड से युवा पीढ़ी में उत्साह बढ़ेगा।

पत्रकारिता चमत्कार नहीं, श्रम-कर्म और कौशल है: कोठारी

पत्रकारिता चमत्कार नहीं। श्रम है, कर्म है, कौशल है और पत्रकार इनकी आत्मा है। शेष सभी साधन है। पत्रकारिता सिखाई जा सकती है। पत्रकार पैदा होते हैं या समय की धार पर तैयार होते हैं। यह कहना है पत्रिका समूह के प्रधान सम्पादक गुलाब कोठारी का। उन्होंने कहा कि मीडिया की भूमिका पर आज जितने प्रश्न उठने लगे हैं, पहले कभी नहीं उठे। गुजरात के दंगे रहे हों या मुम्बई का आतंककारी हमला, लोग कहने लगे हैं कि धीरे-धीरे पत्रकारिता का मूल उद्देश्य छूटता जा रहा है। व्यापार और मनोरंजन हावी हो रहा है।
आज पूरा विश्व आतंकवाद से आतंकित है। ऎसे में इस नई पत्रकारिता के दम पर कैसे लोगों में प्राण फूंकेंगे? पत्रकारिता को अन्य सभी हितों से ऊपर उठकर देशहित के लिए संकल्पित हो जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि राजस्थान पत्रिका किसी उद्योगपति अथवा धनाढ्य परिवार का समाचार पत्र नहीं है। श्रद्धेय बाबूसा ने मात्र 500 रूपए की उधार की रकम से इसे शुरू किया था। आज उस उधार को समाज को लौटाने का विनम्र प्रयास कर रहे हैं। जैसा बीज होता है वैसा ही पेड़ होता है और वैसे ही फल लगते हैं। इस अखबार का सत्य यही है कि पिछले पांच दशकों में इसे संकल्प से ही सींचा गया है। आज पत्रिका समूह के अखबार प्रतिदिन लगभग दो करोड़ पाठकों द्वारा पढ़े जा रहे हैं। देश के बड़े पांच हिन्दी अखबारों में इसका स्थान है।

उन्होंने कहा कि जिनके नाम (कर्पूर चन्द्र कुलिश) से यह अवार्ड दिया जा रहा है, और राजस्थान पत्रिका सदा एक-दूसरे के पर्याय ही बने रहे। एक ही लक्ष्य, एक ही स्वप्न और सम्पूर्ण जीवन यात्रा की एक ही कहानी। इसीलिए पत्रिका आज आत्मा का, आत्मीयता का अखबार बन पाया है। लोग अपने धर्म ग्रन्थों की तरह इस पर विश्वास करते हैं।

इसमें लिखे हुए को जीवन में उतारने का प्रयास भी करते हैं। ऎसे अनेक अवसर आ चुके हैं, जब पूरे प्रदेश ने पत्रिका के साथ खड़े होकर दिखाया। मध्यप्रदेश के भोपाल में तो एक आह्वान पर डेढ़ लाख लोग तालाब में श्रमदान करने पहुंच गए। केसी कुलिश अवार्ड भी आज की पत्रकारिता को नए सिरे से पल्लवित और पुष्पित करने का प्रयास है।

पुरस्कार हरिन्दर बवेजा को

देश के कई वरिष्ठ राजनेताओं, केन्द्रीय मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, संगीत, फैशन, विज्ञापन व कॉरपोरेट जगत की हस्तियों की मौजूदगी में हुए इस समारोह में इस वर्ष का केसीके अवार्ड वरिष्ठ पत्रकार हरिन्दर बवेजा और उनकी टीम को हिन्दुस्तान टाइम्स में प्रकाशित उनकी स्टोरी वेलकम टू द हैडक्वार्टर्स ऑफ लश्कर-ए-तैयबा के लिए केसीके पुरस्कार प्रदान किया गया। पुरस्कार के रूप में उन्हें प्रशस्ति पत्र, मैडल और 11 हजार अमरीकी डॉलर का चैक दिया गया।

इस वर्ष पुरस्कार की थीम आतंकवाद और समाज रखी गई थी। इस विषय पर आधारित देश-विदेश के प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशित दस समाचारों को मेरिट अवार्ड भी दिए गए। अंत में राजस्थान पत्रिका के डिप्टी एडीटर भुवनेश जैन ने धन्यवाद दिया। संचालन सहायक महाप्रबंधक प्रवीण नाहटा ने किया।

बहुत पुराना सम्बन्ध है राजस्थान से

इस मौके पर लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने अपनी चिर-परिचित गम्भीर और संवेदनशील शैली में अपना उद्बोधन दिया और कहा कि राजस्थान से उनका बहुत पुराना सम्बन्ध है। उन्होंने कहा कि मैं वनस्थली विद्यापीठ में थी और बहुत समय जयपुर में रही। यह वह समय था, जब मैं अपने जीवन के लिए तैयार हो रही थी, इसलिए आज मुझ में जो भी अच्छी बात है उसकी वजह राजस्थान है। उन्होंने कहा कि पत्रिका समूह के प्रधान सम्पादक गुलाब कोठारी से उनका परिचय जयपुर में तब हुआ था, जब वे सामाजिक न्याय व अघिकारिता मंत्री के नाते विकलांगों के एक कार्यक्रम मे गई थीं और वहां गुलाब कोठारी भी आए थे। तभी मुझे लगा था कि वे संवेदनशील व्यक्ति हैं।

उन्होंने कहा मैं इस कार्यक्रम में आई ही इसलिए हूं कि गुलाब कोठारी उस कार्यक्रम में आए थे। यह संवेदनशीलता का सम्बन्ध है।

हिन्दी की बेचारगी खत्म कीजिए

मीरा कुमार ने कहा कि हिन्दी वास्तव में बहुत बेचारी भाषा हो गई है, लेकिन इसकी बेचारगी खत्म होनी चाहिए। हर भाषा की अपनी गरिमा और सौष्ठव होता है। इससे खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मैं राजस्थान पत्रिका का सोमवार और गुरूवार का अंक जरूर पढ़ती हूं, क्योंकि इसमें अक्षर यात्रा आता है, जो हर अक्षर के महत्व को बताता है। हिन्दी के लिए राजस्थान पत्रिका के इस प्रयास को मैं साधुवाद देना चाहती हूं।

हमारा भी कर्ज है

मीरा कुमार ने कहा कि कुलिश ने यह समाचार पत्र 500 रूपए के कर्ज से शुरू किया था और पत्रिका आज अपने तरीके से यह कर्ज चुका रहा है। हम सभी का भी समाज के प्रति कुछ कर्ज है जिसे हमें चुकाना चहिए।

तमसो मा ज्यातिर्गमय

मीरा कुमार ने कहा कि इस समारोह की शुरूआत दीप प्रज्जवलन से हुई है, इसलिए मेरी कामना है कि पत्रकारिता अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाए, सत्य से असत्य को दूर करे और हम जो मरणासन्न हैं उन्हें जीवन प्रदान करे। उन्होंने कहा कि पत्रिका ने यह पुरस्कार शुरू कर विश्व को जोड़ा है।

…तो गिरफ्तार हो जाती

पुरस्कार प्राप्त करने वाली वरिष्ठ पत्रकार हरिन्दर बवेजा ने पुरस्कृत स्टोरी की जानकारी देते हुए कहा कि इस स्टोरी को करने से पहले मैंने अपने सम्पादक तरूण तेजपाल से कहा था कि लश्कर-ए-तैयबा के मुख्यालय जाऊंगी तो गिरफ्तार कर ली जाऊंगी, इस पर मेरे सम्पादक ने कहा कि गिरफ्तार हो जाओगी, तो और अच्छी स्टोरी बन जाएगी। उन्होंने कहा कि इस स्टोरी के लिए उनकी सहायता पाकिस्तान के एक वरिष्ठ राजनेता ने की जो साबित करता है कि वहां के राजनेता ऎसे संगठनो को प्रश्रय देते हैं।

कई दिग्गज हस्तियां पहुंची

अवार्ड समारोह में पूर्व केन्द्रीय मंत्री व सांसद लालूप्रसाद यादव, रामविलास पासवान, शरद यादव, मुरली मनोहर जोशी, शीशराम ओला, अखिलेशप्रसाद यादव, राजस्थान के पूर्व राज्यपाल मदनलाल खुराना, भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अरूण चतुर्वेदी, केन्द्रीय मंत्री भरत सिंह सोलंकी, टॉम बदक्कन, नमोनारायण मीणा, महादेव खण्डेला, सचिन पायलट, राज्यसभा सांसद ज्ञानप्रकाश पिलानिया, सांसद ताराचंद भगोरा, ज्योति मिर्घा, बद्रीराम जाखड़, रघुवीर मीणा, प्रभा ठाकुर, खिलाड़ीराम बैरवा, लालचंद कटारिया, हरीश चौधरी, इज्येराज सिंह, अतुलकुमार अंजान, रतन सिंह, भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद, सुमित्रा महाजन, कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी, प्रवक्ता मोहन प्रकाश, अभिषेक मनु सिंघवी, कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव भंवर जितेन्द्र सिंह, वेदप्रकाश, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा, फैशन डिजाइनर राघवेन्द्र राठौड़, सरोद वादक उस्ताद अमजद अली खान, मध्यप्रदेश के जनसम्पर्क मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा, विधायक ओम बिड़ला, भवानी सिंह राजावत, रामकेश मीणा, कर्नल सोनाराम व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजीव शुक्ला सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।

कॉरपोरेट जगत से भी

समारोह में कॉरपोरेट की प्रमुख हस्तियां भी शामिल रहीं। इनमें स्टारकॉम के दक्षिण एशिया प्रमुख रवि किरन, एमिटी यूनिवर्सिटी के असीम चौहान, मेडिसिन एडवर्टाइजिंग के सेम बलसारा, आर.के. स्वामी एडवर्टाइजिंग के शेखर स्वामी, स्टील अथॉरिटी ऑफ इण्डिया के चेयरमैन एस.के. रूंगटा, सूर्या फू ड्स के शेखर अग्रवाल, होण्डा स्कूटर्स के वाइस प्रेसीडेण्ट ज्ञानेश्वर सेन, फैशन डिजाइनर राहुल जैन, मारूति इण्डस्ट्रीज के मार्केटिंग निदेशक मयंक पारीक, आकाश इंटरनेशनल के निदेशक जे.सी. चौधरी आदि शामिल हैं।


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