पाएं खुशियां ही खुशियां

8 08 2009

चिंता अच्छे से अच्छे आदमी को बीमार बना सकती है। चिंता को जीतने का सर्वश्रेष्ठ तरीका समस्या का विश्लेषण कर उसके अनुसार हल निकालना है। चिंता के बारे में सोचें, मगर उसे स्वयं पर हावी न होने दें। प्रसिद्ध दार्शनिक और चिंतक डेल कारनेगी ने अपनी पुस्तक “चिंता छोड़ो, सुख से जियो” में चिंता दूर करने के कई कामयाब नुस्खे बताए हैं। इनमें से आपके लिए पेश हैं चुनिंदा फार्मूले।
पहला फार्मूला
इससे पहले की चिंता आपको खत्म करे आप चिंता को खत्म कर दें।
वह रात मुझे याद रहेगी जब मैरियन जे. डगलस ने हमें क्लास में अपनी आप बीती सुनाई। उसने हमें बताया कि कैसे उसके घर में दो हादसे हुए। पहली बार उसकी प्यारी सी पांच साल की बच्ची मर गई और दस माह बाद पैदा हुई एक और लड़की पांच दिन में ही चल बसी।
यह दोहरा हादसा असहनीय था। मैरियन ने कहा, “मैं इसे नहीं झेल पाया। मैं न तो सो पाता, न खा पाता, न ही आराम कर पाता। मेरी हिम्मत टूट चुकी थी और मेरा आत्मविश्वास जवाब दे चुका था। ऎसा लगता था जैसे मेरा शरीर किसी शिकंजे में जकड़ा हो और शिकंजा लगातार कसता जा रहा हो। परन्तु ईश्वर की कृपा से मेरा एक बच्चा जीवित था। मेरा चार साल का पुत्र। उसने मेरी समस्या सुलझा दी। एक दोपहर जब मैं दुख में डूबा बैठा था तो, उसने आकर कहा, “डैडी मेरे लिए बोट बना दो।” उस समय कुछ भी करने का मूड नहीं था। परन्तु मेरा बेटा जिद्दी था। आखिरकार मुझे हार माननी पड़ी। उसकी टॉय बोट बनाने में मुझे तीन घंटे लगे। जब मैंने बोट पूरी बना ली तब जाकर मुझे अहसास हुआ कि दरअसल महीनों की चिंता के बाद इन तीन घंटों में मुझे इतनी शांति और मानसिक राहत मिली थी। इस खोज ने मुझे नींद से जगाया। सोचने पर मजबूर कर दिया। कई महीनों में पहली बार मैं कुछ सोच रहा था। मैंने महसूस किया कि जब हम किसी काम की योजना बनाने और सोचने में व्यस्त हो जाते हैं, तो चिंता करना मुश्किल होता है। मेरे मामले में बोट बनाने के काम ने मेरी चिंता को चारों खाने चित्त कर दिया। इसलिए मैंने फैसला किया कि मैं खुद को व्यस्त रखूंगा।”
“अगली रात को मैं पूरे घर में घूमा और उन कामों की सूची बनाई, जो किए जाने चाहिए थे। दो सप्ताह में मैंने 242 कामों की सूची बना ली। अगले दो साल में मैंने इनमें से ज्यादातर काम पूरे कर दिए। इसके अलावा मैंने अपने जीवन को प्रेरक और दूसरी गतिविधियों में व्यस्त कर दिया। मैं अब इतना व्यस्त हूं कि मुझे चिंता करने के लिए वक्त ही नहीं मिलता।”
व्यस्त रहने जैसे सामान्य कार्य से हमारी चिंता क्यों दूर हो जाती हैक् ऎसा एक नियम के कारण होता है। यह नियम मनोविज्ञान के सबसे मूलभूत नियमों में से एक है। यह नियम है-“कोई भी मानवीय मस्तिष्क, चाहे वह कितना ही प्रतिभाशाली क्यों न हो, एक समय में एक से ज्यादा चीजों के बारे में नहीं सोच सकता।
जॉर्ज बर्नाड शॉ सही थे। उन्होंने अपने एक वाक्य में सब कुछ कह दिया। उनका कहना था,”दुखी होने का रहस्य यह है कि आपके पास यह चिंता करने की फुरसत हो कि आप सुखी हैं या नहीं।” तो इस बारे में सोचने की झंझट ही नहीं पालें। अपने हाथ मलें। कमर कसें और व्यस्त हो जाएं।
दूसरा फार्मूला
याद रखें, आपके जैसा इस दुनिया में कोई नहीं है।
एक बड़ी तेल कंपनी के रोजगार निदेशक पॉल बॉइन्टन से मैंने पूछा कि लोग रोजगार के लिए आवेदन देते समय सबसे बड़ी गलती कौन सी करते हैं। बॉइन्टन हजारों लोगों के इंटरव्यू ले चुके थे और उन्होंने इस विषय पर एक पुस्तक भी लिखी थी। उनका कहना था, “नौकरी के लिए आवेदन देने में लोग सबसे बड़ी गलती यह करते हैं कि वे अपने वास्तविक स्वरूप में नहीं रहते। अपने असली व्यक्तित्व में रहने और पूरी तरह खुलकर बताने के बजाए वे अक्सर ऎसे जवाब देने की कोशिश करते हैं, जो उनके हिसाब से आप सुनना चाहते हैं। परन्तु यह तरीका सफल नहीं होता, क्योंकि कोई भी नकली चीज नहीं चाहता। कोई भी जाली सिक्का नहीं चाहता।”
आप में और मुझमें इस तरह की योग्यताएं हैं, इसलिए इस बात की चिंता करने में एक पल भी बर्बाद न करें कि हम दूसरे लोगों की तरह नहीं हैं। आप इस दुनिया में एकदम अनूठे हैं। जेनेटिक्स विज्ञान हमें बताता है कि आप जो हैं, वह पूरी तरह से आपके पिता के चौबीस और आपकी माता के चौबीस क्रोमोसोम की देन है। हर क्रोमोसोम में दर्जनों से लेकर सैंकड़ों जीन्स हो सकते हैं और कई बार तो एक जीन ही इंसान के पूरे जीवन को बदलने की क्षमता रखता है।
आपके माता-पिता के मिलने और समागम के बाद आपकी तरह का निश्चित इंसान पैदा होने की संभावना तीन लाख बिलियन में से एक थी। दूसरे शब्दों में, अगर आपके तीन लाख बिलियन भाई-बहन होते तो, वे सबके सब आपसे अलग हो सकते थे। क्या यह बात अनुमान पर आधारित है। जी नहीं। यह एक वैज्ञानिक तथ्य है। जब चार्ली चैप्लिन फिल्मों में आए, तो फिल्म निर्देशकों ने इस बात पर जोर दिया कि चैप्लिन उस युग के एक लोकप्रिय जर्मन कॉमेडियन की नकल करें। परन्तु चार्ली चैप्लिन को तब तक कामयाबी नहीं मिली जब तक उन्होंने अपने असली स्वरूप में अभिनय नहीं किया।
इमर्सन ने “सेल्फ-रिलायेंस” निबंध में लिखा है, “हरेक इंसान में जो शक्ति निवास करती है, वह प्रकृति में नयी है। दूसरा कोई नहीं, सिर्फ वही जानता है कि वह क्या कर सकता है। वह तब तक नहीं जान सकता, जब तक वह कोशिश न कर ले।” इसलिए यह जान लें कि आप अनूठे हैं। इस बात पर खुश हों और प्रकृति ने आपको जो दिया है, उसका अधिकतम लाभ उठाएं।
तीसरा फार्मूला
अगर आपको नीबू मिले, तो आप नीबू का शर्बत बना लें।
मैं एक दिन शिकागो यूनिवर्सिटी गया और वहां के कुलपति रॉबर्ट मैनार्ड हचिन्स से पूछा, “वे किस तरह चिंताओं को दूर रखते हैं।” उन्होंने जवाब दिया, “जब आपको नीबू मिले तो आप नीबू का शर्बत बना लें।”
“अच्छी चीजों का लाभ उठाना जिंदगी में सबसे महžवपूर्ण बात नहीं है। कोई मूर्ख व्यक्ति भी ऎसा कर सकता है। असली महžव की बात तो यह है कि आप अपने विपरीत हालातों से लाभ उठा सकें। इस काम में बुद्धि की जरूरत होती है और इसी से मूर्ख और समझदार के बीच का फर्क समझ आता है।”
न्यूयार्क में कक्षाएं चलाने के दौरान मैंने यह पाया कि बहुत से लोग मात्र इस बात का अफसोस मनाते हैं कि कॉलेज शिक्षा के बगैर जीवन में सफलता की संभावना कम होती है। मैं जानता हूं कि यह पूरी तरह सच नहीं है। इसलिए मैं अपने विद्यार्थियों को ऎसे इंसान की कहानी सुनाता हूं, जिसने कभी प्रारंभिक शिक्षा भी पूरी नहीं की। वह बेहद गरीबी में पला-बढ़ा। जब उसके पिता मरे, उसके पिता के दोस्तों को चंदा इकटा करके उनके कफन का इंतजाम करना पड़ा। उसके पिता के मरने के बाद उसकी मां छाता बनाने वाली फैक्ट्री में दस घंटे नौकरी करती। इन परिस्थितियों में पला यह लड़का राजनीति में आया और तीस साल का होने से पहले न्यूयार्क राज्य विधानसभा के लिए चुन लिया गया। परन्तु वह इस जिम्मेदारी के लिए कतई तैयार नहीं था। उसने मुझे बताया कि दरअसल उसे यह समझ नहीं आ रहा था कि माजरा क्या है। उसने उन लंबे, जटिल विधेयकों का अध्ययन करने की कोशिश की, जिस पर उसे वोट देना था। परन्तु जहां तक उसका सवाल था, उसके पल्ले कुछ नहीं पड़ता था। वह इतना ज्यादा हताश हो गया कि उसने मुझे बताया, “अगर उसे अपनी मां के सामने हार मानने में शर्म नहीं आई होती तो उसने विधानसभा से इस्तीफा दे दिया होता।” उसने फैसला लिया कि वह हर दिन सोलह घंटे पढ़ेगा और अपने अज्ञान के नीबू से ज्ञान के नीबू का शर्बत बनाएगा। ऎसा करके उसने स्वयं को स्थानीय राजनेता से राष्ट्रीय स्तर का नेता बना लिया। वह इतना लोकप्रिय हुआ कि “द न्यूयार्क टाइम्स” ने उसे “न्यूयार्क के सर्वप्रिय नागरिक ” का खिताब दिया।
मैं अलस्मिथ के बारे में बात कर रहा हूं। वे चार बार न्यूयार्क के गवर्नर चुने गए। उस समय यह एक रिकॉर्ड था, जो उनसे पहले कभी किसी व्यक्ति ने नहीं बनाया था। छह शीर्ष विश्वविद्यालयों ने, जिनमें कोलंबिया और हार्वर्ड भी शçामल थे, इस इंसान को मानद उपाधियों से विभूषित किया, जो कभी अपनी प्रारंभिक शिक्षा भी पूरी नहीं कर पाया था।
अलस्मिथ ने मुझे बताया कि इनमें से कोई चीज क भी नहीं हुई होती अगर उन्होंने हर दिन सोलह घंटे की कड़ी मेहनत नहीं की होती। इसी से वे अपनी नकारात्मक स्थितियों को सकारात्मक अनुभव में बदल सके। “यही जीवन हैक्” नहीं यह जीवन नहीं है। यह जीवन से अधिक है। यह विजयी जीवन है। सुख-शांति का मानसिक रवैया विकसित करने के लिए हमें इस नियम को आत्मसात कर लेना चाहिए।
चौथा फार्मूला
खुद से पूछें, “बुरे से बुरा क्या हो सकता है।”
विलिस एच. कैरियर एक प्रतिभाशाली इंजीनियर थे, जिन्होंने एयर-कंडीशनिंग उद्योग शुरू किया और जो न्यूयार्क में विश्वप्रसिद्ध कैरियर कॉरपोरेशन के प्रमुख थे। चिंता को सुलझाने के लिए इतनी बढि़या तकनीक मैंने बहुत कम सुनी है। कैरियर ने मुझे जो बताया, वह इस प्रकार है-
“मैं न्यूयार्क से बफैलो फोर्ज कंपनी मे काम करता था। मुझे मिसूरी में लाखों डॉलर के कारखाने में गैस साफ करने की मशीन लगाने का काम सौंपा गया। गैस साफ करने का यह तरीका नया था इसलिए मेरे काम में अप्रत्याशित कठिनाईयां आई। मशीन काम करने लगी थी, पर उस तरह नहीं जिस तरह की हमने गारंटी दी थी। साथ में हमें 20 हजार डॉलर का घाटा भी हो रहा था। मैं अपनी इस असफलता से स्तब्ध था। कुछ समय तक तो मैं इतना चिंतित रहा कि मेरी नींद उड़ गई। आखिरकार मुझे एक सीधी सी बात समझ में आ गई कि चिंता करने से मुझे कोई फायदा नहीं होने वाला। मैंने बिना चिंता किए समस्या का हल ढूंढने का रास्ता निकाला। मैंने तीन कदम उठाए।”
पहला कदम- मैंने बिना डरे, ईमानदारी से स्थिति का विश्लेषण किया और अनुमान लगाया कि इस असफलता के परिणामस्वरूप मेरे साथ बुरे से बुरा क्या हो सकता है।
दूसरा कदम- बुरे से बुरे परिणामों का अनुमान लगाने के बाद आवश्यकता पड़ने पर इसे स्वीकार करने के लिए मैंने खुद को तैयार किया।
“बुरी से बुरी स्थिति का अनुमान लगाने और जरूरत पड़ने पर इसे स्वीकार करने के बाद एक महžवपूर्ण बात हुई। मैं तत्काल शांत हो गया और काफी दिनों बाद मैंने पहली बार राहत की सांस ली।”
तीसरा कदम- इसके बाद मैंने अपना पूरा समय और ऊर्जा शांति के साथ इस काम में लगाई कि उन बुरे से बुरे परिणामों को कैसे सुधारा जाए जिन्हें मानसिक रूप से मैंने पहले ही स्वीकार कर लिया था।
मैंने अब ऎसे तरीके खोजने शुरू किए, जिनसे मैं अपनी असफलता को सफलता में बदल सकता था और 20 हजार डॉलर के घाटे को कम कर सकता था। इसके लिए मैंने कई परीक्षण किए और अंत में इस नतीजे पर पहुंचा कि अगर हम एक अतिरिक्त यंत्र खरीदने में पांच हजार डॉलर और खर्च करें, तो हमारी समस्या सुलझ सकती है। हमने ऎसा ही किया। नतीजा, हमारी कंपनी को 20 हजार डॉलर का घाटा होने के बजाए 15 हजार डॉलर का फायदा हो गया।
कैरियर ने आगे कहा, “अगर मैं चिंता करता रहता तो शायद यह कभी नहीं कर पाता, क्योंकि चिंता के साथ बहुत बुरी बात यह है कि यह हमारी एकाग्रता की शक्ति को खत्म कर देती है। हम निर्णय ले पाने की शक्ति खो देते हैं। परन्तु जब हम बुरे से बुरे परिणाम का सामना करने के लिए खुद को विवश करते हैं और उसे मानसिक रूप से स्वीकार कर लेते हैं, तो हम इस स्थिति में आ जाते हैं कि अपनी समस्या पर पूरी एकाग्रता से विचार कर उसे हल कर सकें।”
चिंताजनक स्थितियों को सुलझाने के जादुई टिप्स
– व्यस्त रहें। चिंतित आदमी को पूरी तरह से काम में डूब जाना चाहिए, वरना वह निराशा में मुरझा जाएगा।
– दुखी होने का कारण यह है कि आपके पास यह चिंता करने की फुरसत हो कि आप सुखी हैं या नहीं।
– अपने आपको ऎसी छेाटी-छोटी बातों से विचलित होने की अनुमति नहीं दें, जिन्हें हमें नजरअंदाज कर देना चाहिए।
– खुशी के विचार सोचें, खुशी का अभिनय करें और धीरे-धीरे आप खुशी का अनुभव करने लगेंगे।
– अपनी नियामतें गिनें, कष्ट नहीं।
– अपने दुश्मन के लिए नफरत की भट्टी को इतनी तेज नहीं करें कि आप खुद भी उसमें जल जाएं।
– हर दिन एक अच्छा काम करें, जिससे किसी के चेहरे पर मुस्कुराहट आ जाए।


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